गैनोडर्मा अपना काम कैसे करता हैं ?

गैनोडर्मा अपना काम कैसे करता हैं ? How does Ganoderma work?


आयुर्वेदिक पौष्टिक आहार
रिशी गैनो फल का भाग RG
गैनो सिलियम जड़ का भाग GL
1.स्कैनिंग(Scanning)-शरीर में जाने के बाद सबसे पहला कार्य, स्कैनिंग का करती है।अर्थात कोशों में पहुँच कर यह तलाश करना कि वहां रोग के कौन कौन से जीवाणु कहाँ कहाँ हैं,कौन-कौंन सा कौश कमजोर है और उन में क्या दूषित पदार्थ पड़े हैं इस कार्य के लिए गैनोडर्मा अधिक से अधिक 1से 30 दिन का समय लेती है। शरीर के अनुसार यह कार्य 2 दिन में भी हो जाता है और 30 दिन में भी हो सकता है।

2. क्लीनिंग(Detoxification) उपरोक्त कार्य पूर्ण करने के बाद,कोशों से जीवाणु तथा दूषित पदार्थों को बाहर निकाल फेकने का कार्य प्रारम्भ होता है। पानी में घुलनशील जीवविष को पेशाब , पसीना आदि द्वारा बाहर निकालती है। किन्तु जो पानी में घुलनशील नहीं हैं ,उन्हें अन्य तरीके से निकालते है। जीवविष को बाहर निकालने की प्रक्रिया में जब कचरा बाहर आता है, सुधारवादी प्रक्रिया होती है। इसे Improvement Reactions कहते हैं। शरीर में एकत्रित जीवविषों के अनुसार अधिक पसीना आना,अधिक पेशाब,सददर्द,गैस,कब्ज,सुस्ती आदि की शिकायत होना आम बात है। यह आवश्यक तो नहीं किन्तु होने पर शुभ लक्षण माना जाता है। यह एक या दो दिन के लिये ही होता है। अतः घबराने की कोई बात नहीं है। विचित्र प्रतिक्रियाएँ व असाधारण तरह के अनुभव भी हो सकते हैं, किन्तु यह कोई गम्भीर मामला नहीं होता। इसे कुप्रभाव नहीं समझना चाहिये। किसी रोग को मिटाने की यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो एक या दो दिन में शान्त हो जाती हैं। प्रायः ये 95 प्रतिशत सहन करने योग्य हैं। 4 प्रतिशत केसों में गैनोडर्मा की मात्रा आधी की जा सकती है तो मात्र 1 प्रतिशत केस में तकलीफ अनुसार कोई अन्य दवाई भी ली जा सकती है। बाद में पुन: गैनोडर्मा की मात्रा नियमानुसार चालू कर देनी  चाहिए। Detoxification का यह कार्य पहले या अधिक से अधिक 1 से 30 सप्ताह में पूर्ण कर लेती है।

2.बैलेन्स(Regulating) इसके बाद तंत्र व अवयवों को सन्तुलित करने का काम करता है।इस असन्तुलन के कारण भी हम रोग ग्रसित होते हैं।
3. रीजरेशन (पुर्नजीवन) शरीर में इसका अन्तिम कार्य नये कोशों को उत्पन्न करने का होता है। जो वृध्दत्व को पीछे ले जा कर, नवयौवन प्रदान करता है।
सब जानते है कि कोशिकायें स्वस्थ्य तो शरीर स्वस्थ, कोशिकायें बीमार तो शरीर बीमार,कोशिकायों की मृत्यु तो शरीर की मृत्यु।इस कार्य को पूर्ण होने में अधिक से अधिक 1 से 3 वर्ष तक का समय लगता है।

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