Health Wealth Happiness



Health wealth happiness

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Presentation Post
बेहतर स्वास्थ्य,समृध्दि और सुख का आधार
Health Wealth Happiness
DXN 25 Say Hello to Freedom
1993-2017 By
Ganoderma
स्वास्थ्य ही धन है
(हमारे शरीर से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य)
(1) रक्त संचार
हमारे शरीर में 1 लाख किलोमीटर के बराबर रक्त की वाहिनियाँ है,जिनसे होकर हमारा रक्त संचारित होता है।
(2) हृदय
हमारा हृदय 24 घंटे में 1 लाख बार धड़कता है।
24 घंटे में एक पेट्रोल टैंकर के बराबर रक्त का प्रवाह करता है।
(3) फेफड़े
हमारे फेफड़े 24 घंटे में 36000 बार श्वासन क्रिया करते है। यदि खींचकर फैलाया जाए तो एक टेनिस कोर्ट को ढका जा सकता है।
(4) किडनी
हमारी दोनों किडनी 24 घंटे मे पूरे शरीर के रक्त की 360 बार साफ-सफाई कर देती है।
(स्वस्थ जीवन की आवश्यकता)
(1) स्वच्छ वायु
(2) स्वच्छ जल
(3) पोषक आहार
(4) निरन्तर व्यायाम
(आधुनिक युग में हमारी आपूर्ति)
(1) प्रदूषित वायु
(2) प्रदूषित जल
(3) भोजन में पोषक तत्वों की कमी
(4) टाइम नहीं है
( इसका परिणाम और कीमत जो हम चुका रहे हैं )
News India
विश्व में दमे के एक तिहाई मरीज अकेले भारत मे
पैर काटने के 70 फीसदी मामले मधुमेह के कारण
हवा-जहर पानी-जहर
क्या करें गेहूं की रोटी भी हुई जहरीली
पानी की तरह अब डिब्बाबंद शुद्ध हवा बेचने की तैयारी
भारत में बिकने वाली हर चौथी दवा में एक नकली
रोक के बाद भी हो रही आक्सीटोसीन की बिक्री
बेमतलब तो नहीं खा रहे एंटीबायोटिक
दिल्ली का प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए चेतावनी
एंटीबायोटिक्स से बच्चों में डायबिटीज का खतरा
बेअसर हो सकती हैं दवाइयां
बैक्टीरिया विकसित कर लेते हैं प्रतिरोधक क्षमता
{क्या हमारे पास इससे बचने का कोई उपाय है}
{ कुदरत का अनमोल स्वास्थ्य का खजा़ना }
【KiNG OF HERBS】
आरोग्यवर्धक
अद्वितीय
अनमोल
अतिदुर्लभ
आलौकिक
अद्भूत
अवर्णनीय
प्राचीन
Ganoderma Lucidum
वैज्ञानिक नाम :- गैनोडर्मा ल्यूसिडम
चीन मे:- लिंगजी
जपान मे :- रिशी
भारत मे :- दिव्य मशरूम
के नाम से जाना जाता है।
{ गैनोडर्मा से सम्बन्धित कुछ तथ्य: }
गैनोडर्मा का इतिहास 5000 बर्षो से भी अधिक पुराना है।(First Records : Sheng Nong's Herbal-Classic) आयुर्वेद ग्रन्थ के चरक सहिंता में छत्रक चिकित्सा के नाम से गैनोडर्मा से उपचार की विधि का वर्णन किया गया है।
हदीस शरीफ की किताबों में खुम्बी अर्थात् मशरुम के लिए '' अलकमअतु '' शब्द का उपयोग किया गया है। अरब देश के लोगा '' नवातुर्रअद '' यानी कि आसमानी बिजली की सब्जी के नाम से इसे जानते हैं  । रसूल-ए-खुदा हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसकी तारीफ फरमाई है। उन्होंने कहा खुम्बी -'' मन '' में से है। इसका पानी आंखों के लिए शिफा है।
आधुनिक/वैज्ञानिक रिसर्च पिछले 100 वर्षो से भी अधिक समय से जारी है।
गैनोडर्मा पर विशेष रुप से रिसर्च के लिए विश्व के वैज्ञानिकों ने एक समूह का गठन किया है। जिसका नाम है- गैनोडर्मा इण्टरनेशल रिसर्च इन्स्टीच्यूट । ( GIRI-Ganoderma International Research Institute-1993 )
भारत के विश्वविघालयों/रिसर्च सेन्टरों में रिसर्च जारी है :- यूनिवर्सिटी आफ मद्रास-जबलपुर (म0प्र0) आई 0आई0टी0 रूड़की (उत्तरांचल) इत्यादि। इण्टरनेट पर 15,10,000 से भी अधिक वेबपेज और हजारों वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर उपलब्ध है। गैनोडर्मा में 700 से भी अधिक सक्रिय तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को कई प्रकार से मदद करते हैं। WORLD JOURNAL OF PHARMACEUTICAL RESEARCH
Volume 3, Issue 3, 4520-4526. Research Article ISSN 2277-7105
IMPACT OF GANODERMA LUCIDIUM ON CARBON TETRA CHLORIDE (CCl4) INDUCED HAEMATOLOGICAL PROFILES OF MICE
ALL India 466 Branches
Ganoderma Thanks



गैनोडर्मा में निहित तत्व व उनकी कार्य प्रणाली:-

गैनोडर्मा में निहित तत्व व उनकी कार्य प्रणाली:-


गैनों में पाये जाने वाले 200 तत्वों में जिन
तत्वों की खोज हो चुकी है वे मुख्य
औषधीय (Therapeutic) तत्व इस प्रकार
हैं
1. Polysaccharide (शुध्दीकरण तत्व)
यह तत्व शरीर में जाकर पहले पहचान
कर रोगों और उनके कारणों को व दूषित
पदार्थों को तलाशते हैं।तलाश के बाद
दूषित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते
हैं। यह तत्व पानी में घुलनशील होते हैं।
यह तत्व रोग प्रतिरोधक शक्ति प्रदान
करते हैं,असामान्य कोशों को खराब होने
से रोकते हैं और खून में शर्करा की मात्रा
कम करते हैं। यह तत्व कोशों को मजबूत
बनाते हैं और लाल रक्त कणों की और
प्राणवायु वहन करने की क्षमता बढ़ाते हैं।

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गैनोडर्मा अपना काम कैसे करता हैं ?

गैनोडर्मा अपना काम कैसे करता हैं ? How does Ganoderma work?


आयुर्वेदिक पौष्टिक आहार
रिशी गैनो फल का भाग RG
गैनो सिलियम जड़ का भाग GL
1.स्कैनिंग(Scanning)-शरीर में जाने के बाद सबसे पहला कार्य, स्कैनिंग का करती है।अर्थात कोशों में पहुँच कर यह तलाश करना कि वहां रोग के कौन कौन से जीवाणु कहाँ कहाँ हैं,कौन-कौंन सा कौश कमजोर है और उन में क्या दूषित पदार्थ पड़े हैं इस कार्य के लिए गैनोडर्मा अधिक से अधिक 1से 30 दिन का समय लेती है। शरीर के अनुसार यह कार्य 2 दिन में भी हो जाता है और 30 दिन में भी हो सकता है।

2. क्लीनिंग(Detoxification) उपरोक्त कार्य पूर्ण करने के बाद,कोशों से जीवाणु तथा दूषित पदार्थों को बाहर निकाल फेकने का कार्य प्रारम्भ होता है। पानी में घुलनशील जीवविष को पेशाब , पसीना आदि द्वारा बाहर निकालती है। किन्तु जो पानी में घुलनशील नहीं हैं ,उन्हें अन्य तरीके से निकालते है। जीवविष को बाहर निकालने की प्रक्रिया में जब कचरा बाहर आता है, सुधारवादी प्रक्रिया होती है। इसे Improvement Reactions कहते हैं। शरीर में एकत्रित जीवविषों के अनुसार अधिक पसीना आना,अधिक पेशाब,सददर्द,गैस,कब्ज,सुस्ती आदि की शिकायत होना आम बात है। यह आवश्यक तो नहीं किन्तु होने पर शुभ लक्षण माना जाता है। यह एक या दो दिन के लिये ही होता है। अतः घबराने की कोई बात नहीं है। विचित्र प्रतिक्रियाएँ व असाधारण तरह के अनुभव भी हो सकते हैं, किन्तु यह कोई गम्भीर मामला नहीं होता। इसे कुप्रभाव नहीं समझना चाहिये। किसी रोग को मिटाने की यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो एक या दो दिन में शान्त हो जाती हैं। प्रायः ये 95 प्रतिशत सहन करने योग्य हैं। 4 प्रतिशत केसों में गैनोडर्मा की मात्रा आधी की जा सकती है तो मात्र 1 प्रतिशत केस में तकलीफ अनुसार कोई अन्य दवाई भी ली जा सकती है। बाद में पुन: गैनोडर्मा की मात्रा नियमानुसार चालू कर देनी  चाहिए। Detoxification का यह कार्य पहले या अधिक से अधिक 1 से 30 सप्ताह में पूर्ण कर लेती है।

2.बैलेन्स(Regulating) इसके बाद तंत्र व अवयवों को सन्तुलित करने का काम करता है।इस असन्तुलन के कारण भी हम रोग ग्रसित होते हैं।
3. रीजरेशन (पुर्नजीवन) शरीर में इसका अन्तिम कार्य नये कोशों को उत्पन्न करने का होता है। जो वृध्दत्व को पीछे ले जा कर, नवयौवन प्रदान करता है।
सब जानते है कि कोशिकायें स्वस्थ्य तो शरीर स्वस्थ, कोशिकायें बीमार तो शरीर बीमार,कोशिकायों की मृत्यु तो शरीर की मृत्यु।इस कार्य को पूर्ण होने में अधिक से अधिक 1 से 3 वर्ष तक का समय लगता है।

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