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अभी तो बहोत कुछ बाकी हैं ?

 अभी तो बहोत कुछ बाकी हैं ?

अभी तो बहोत कुछ बाकी हैं ?


आहिस्ता चल जिंदगी, अभी

कई कर्ज चुकाना बाकी है कुछ दर्द मिटाना बाकी है

कुछ फर्ज निभाना बाकी है रफ़्तार में तेरे चलने से

कुछ रूठ गए कुछ छूट गए

रूठों को मनाना बाकी है रोतों को हँसाना बाकी है

कुछ रिश्ते बनकर टूट गए

कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए उन टूटे - छूटे रिश्तों के

जख्मों को मिटाना बाकी है

कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं

कुछ काम भी और जरूरी हैं

जीवन की उलझ पहेली को पूरा सुलझाना बाकी है

जब साँसों को थम जाना है

फिर क्या खोना, क्या पाना है पर मन के जिद्दी बच्चे को

यह बात बताना बाकी है

आहिस्ता चल जिंदगी, अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है

कुछ दर्द मिटाना बाकी है

कुछ फर्ज निभाना बाकी है !


मैं खुद से प्यार करता हूं |

मैं खुद से प्यार करता हूं |

I love myself



मै खुद से प्यार करता हू और मै खुद को अपनाता हू|
मेरे दिल के गहराईओ मे एक अन्नत प्यार का लहेर है प्यार से मेरा रोम रोम भरा है मुझमे हर दिशा से झलक रहा है जो मुझमे दुगना हो के लोटता है मै हर दिन ज्यादा प्यार देता हू और पाता हू और ऐ हमेशा चलता रहेगा |
मै खुद से प्यार करता हू तभी तो मै अपना शरिर का ध्यान कर पाऊगा मै खुद से प्यार करता हू तभी तो अपने आप को एक अराम दायक घर दिला पाऊगा मै खुद से प्यार करता हू तभी तो मै बिजनेस करता हू और हमेशा करता रहूगा |
मै खुद से प्यार करता हू तभी तो मेरा सोच और नजरीया दूसरो के लिऐ भी वैसा ही है |
मै खुद से प्यार करता हू तभी तो मैने सब को माफ कर दिया और अदित को जाने दिया |
मै खुद से प्यार करता हू तभी तो मै आज मे जिता हू हर पल खुशि  का ऐहसास कर रहा हू ऐ जनते हुऐ की मेरा भविष्य उज्वल है खुशनूमा है सुरक्षित है मै इस  ब्रह्माण्ड का बहोत ही प्यारा संतान  हु ऐ ब्रह्माण्ड मेरा देख भाल करता है | हमेशा हमेशा के लिऐ मै वाकि मै तुम से प्यार करता हू बहोत बहोत प्यार |

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मेरे सभी सम्बंध एक जैसे ही है मैं जो कुछ कर रहा हूं उस से मै पुरी तरह सहमत हूं हर तजूरबा एक कमेयावी ला रहा है मुझे सब अच्छा मिलेगा मैं जान गया हूं जो मेरा मन करता है उसे मैं प्यार से सुनता हूं मैं तंदुरुस्त हूं मैं अपने आप में पुर्ण हूं मैं अपनी जिंदगी के सारी अच्छाईयां के लिए कुदरत का शुक्रगुजार हूं हर दिन एक नया तोहफा लेकर खड़ा है ऐ मेरा जिन्दगी है बाकी ऐ ही मेरा जिन्दगी है मैं बदलने के लिए तैयार हूं । मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मैं सच को जानता हूं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो सब इंसान मुझे अच्छे लगते है मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो ईश्वर मुझे प्यार करते हैं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो ईश्वर मुझे मार्क दर्शन

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करते हैं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मैं सब की मदद करता हूं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो सच के साथ जिता हूं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मैं सभी जीव  से प्यार करता हूं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मैं रहश को जान पाया हूं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मेरा  मदद के लिए सब हमेशा तैयार रहते हैं मैं खुद से प्यार करता हूं तभी तो मैं अपने आप को बदल दिया
। अगर आप को हमारी पोस्ट अच्छा लगे तो आप औरों के साथ साझा करें हमारे पोस्ट पढ़ने के लिए आपको दिल से शुक्रिया। ॐ विष्णवे 

Rajniti kya hai

State policy has now become a business of robbers, not public service.








Hi friends mai aaj aap ko rajniti par kuchh samajhane ka prayas karunga aaj aap sab ko pata to hoga hi ki rajniti kis prakar puri manvata ke liye hanikar jaise hame laga hai jaise lagta hai jan seva nahi aisa moz karne ka dhandha ban gaya hai aaj apna desh ho ya or desh kahi par imandari rajniti me dekhne ko kam hi mil pa raha hai kya ham sab aye hi chup chap dekhte rahege ya fir kuchh naya rachne ki aavsakta hai kya janta ki jo tex ka paise hai us sahi kam me us nahi ho payaga saval to bahot hai fir bhi mai rajniti ke jitne bhi neta hai ya banege mai un se ek hi bat kahna chahunga ki rajniti janseva ke liye banaya gaya hai use ayes moz ka dhandha na baneye des raj jila ye sab rajnitik netao ka jimdari hai ki aap use kaise banate hai achha ya kharab agar aap ko hamari jankari achha laga to hame follow kare like share kare dhanbad.
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भारत में सबसे बड़ी समस्या क्या है GDP क्या होता है ?
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समाज के नजरों में कैसा है आप कोई फर्क नहीं पड़ता

समाज के नजरों में कैसा है आप कोई फर्क नहीं पड़ता |




नमस्कार दोस्तों आज मैं एक और नया विषय लेकर आप के साथ उपस्थित हु जिवन में कभी कभी ऐसा वक्त भी आ जाता है। जब हमें समाज  कभी अच्छा तो कभी ग़लत समझने लगती है। और हम अपने आप को दुखी समझने लगते हैं। पर मैं आप को बता दु आप चाहें समाज के नजर में जैसे भी इंसान हो कौई फर्क नहीं पड़ता। पर इस बात से बहोत ज्यादा फर्क पड़ता है। की ईश्वर के नजरों में आप किस प्रकार के इंसान हैं। सबसे ज्यादा इसी पे हमें सोचना चाहिए। समाज तो वो है जो भगवान को भी गलत साबित करने में पिछे नहीं हटते फिर हमारी और तुम्हारी क्या औकात है। कलियुग की समाज ऐसी हो चुकी है। जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसा हमारा समाज बन गया है।
अगर आप किसी के साथ दे तो आप अच्छे हैं। अगर उनके खिलाफ है। तो आप ग़लत इंसान हैं। ऐही है आज का हमारा समाज जो भगवान के तो हो ही नहीं सकते तो फिर इंसान के क्या होंगे। इस लिए आप को लोग चाहे जैसे भी समझें आप सिर्फ ईश्वर के नजरों में बड़ा बने रहे। कियू की हमें मरने के बाद ईश्वर के पास जाना है। ना की इंसानो के पास रहना है। हमें ईश्वर के पास जा कर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब देना है। तो फिर हम समाज के वज़ह से हम परेशान ‌कियू होते हैं। आज का समाज लगता है। जैसे सच्चाई को भुल ही बैठी है। आज के लोग उन्हें अच्छा मानती है। जो किसी तरह कामयाब है। चाहे वो इंसान अच्छा हो या गलत या फिर छल कपट कर के ही कियू न कामयाब हुआ हो वही अच्छे हैं।
और जो लोग सच्चाई पर है और कामयाब नही है। तो आज के समाज के नजरों में वो बुरे इंसान हैं ऐसा है आज की समाज और लोग। क्या आप को नहीं लगता की हमारा समाज सोने के चक्कर में हिरे को गवा रही है। अगर हमारा पोस्ट अच्छा लगे तो आप औरों के साथ सेयर कर सकते हैं। धन्यवाद ॐ विष्णवे नमः

किसी की मज़बूरी का फायदा न उठाये?

किसी की मज़बूरी का फायदा न उठाये ?

किसी की मज़बूरी का फायदा न उठाये

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाऐ 21 वी सदी के इंसान क्यो की मजबूरी कोई खरिद  कर नहीं लाता। नमस्ते दोस्तो मैं आज आप को इसी विषय पर कुछ बताने वाला हूं। इस समय लोगों ने लगता है कुछ ज्यादा ही तरक्की कर ली है इसी लीऐ तो  सभी लोग ने मजबूरी का फायदा उठाने लगे हैं। लगता है किसी में इंसानियत किसी में बची ही नहीं। ज्यादा तर लोगों को पता ही नहीं है की सब इस धरती पर जन्म कियू लिए है। जब सब को यही पता नहीं तो हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं की आज का इंसान को करना क्या है।जो हम कर रहे हैं सही है या ग़लत है। आज साइनस ने चाहे जितना भी तरक्की कर ली हो पर कही न कही हम कुछ न कुछ तो हम इंसान से छुट रहा है ओ  है हमारी संस्कृति
जो पहले कुछ और थी अब कुछ और है और न जाने आगे कैसी होगी। आज सब किस तरह मजबूरी का फायदा उठाते है। एक झलक देख लेते हैं। जैसे किसी को पैसे की जरूरत लगी और कोई उसे पैसे से उसे मदत करता है‌। तो उसे वास्तव में उसे ओ मदत  नहीं करता बल्कि की उसे मदत के नाम पर उस से व्याज लेगा यही है मजबूरी का फायदा उठाना है। चाहे कोई भी हो कही न कही तो ऐ पाप का एक जन्म है ।और दिन पर दिन ऐ बढ़ेगा ही इस लिए आप किसी को मदत जरूर करें पर मजबूरी का फायदा उठाने का प्रयास ना करें। किसी की मदत करना कोई पाप नहीं पर किसी की मजबूरी का फायदा उठाना बहोत बड़ी गलती है।
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ham sab ek jaise to koee ameer to koee gareeb kiyoo hai

हम सब एक जैसे पर कोई अमीर तो कोई गरीब ऐसा क्यूं ?We are all the same but why are some rich and some poor?



नमस्कार दोस्तों आज मैं एक नया विषय पर आप को जानकारी देने वाला हु। जब हम सब एक जैसे हैं। तो फिर  इंसान कोई अमीर तो कोई गरीब कियू है। तो मैं आप सब को बता दु इंसान चाहे अमीर हो या गरीब हो ओ सब पिछले जन्म का फल है। अगर कोई अमीर व्यक्ति है तो अवश्य ही ओ पिछले जन्म में कुछ अच्छा काम किया होगा। इस लिए ओ इस  जन्म में अमीर है। अगर कोई व्यक्ति गरीब है तो अवश्य ही ओ पिछले जन्म में कुछ बुरे कर्म किए होंगे। भागवत गीता हमें बताती है कि हम सब को हर हाल में पिछले जन्म के किऐ गय कर्म इस जन्म में हमें भोगना ही पड़ेगा गा चाहे हम पिछले जन्म में जैसे भी कर्म किए हो। यदि कोई अमीर
व्यक्ति है और वह किसी गरीब व्यक्ति से दूर व्यवहार करता है उसे बहोत तकलीफ देता हो या फिर वह अपनी कर्तव्य को अच्छे काम में ना लगाता हो चाहे वो किसी भी प्रकार का मर्जी से अच्छे काम नहीं करता हो वह अवश्य ही वह अगले जन्म में गरीब बनेगा। कियू की वह इस जन्म में अमीर बना है। तो पिछले जन्म में वह बहोत ही अच्छे काम किया होगा इसी लिए तो वह इस जन्म में अमीर बना है। इस लिए तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है न अमीरी सदा के लिए है नही गरीबी सदा के लिए है ऐ सब कर्म से वंधे फल है। नहीं दुःख अस्थाई है नही शुख अस्थाई है। इस लिए हम सब को गरीबों के साथ अन्याय नहीं करनी चाहिए। कियूकी जो तुम उसके साथ कर रहे हो कल वहीं आपके साथ होने वाला है।
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जय श्री कृष्ण

मैं सत्य का शब्द हूं ?

I am the word of truth ?


मैं हूं

मैं_सत्य का _शब्द_हूं
अपने आप में ही एक बहोत बड़ी उर्जा समेटी हुईं हैं
मैं ईश्वर का हिस्सा हूं
मैं ईश्वर का रचना हूं
मैं ईश्वर का आकार हूं
मैं ईश्वर वादी इंसान हूं
मैं अपने आप में पुष्पन हूं
मैं बहोत ही खुशनसीब हूं
मैं ईश्वरीय ऊर्जा हूं
मैं आत्मविश्वासी हूं
मैं सत्यवादी हूं
मैं सब का मददगार हूँ
मैं समझदार हूं
मैं ईमानदार हूँ
मैं कर्म योगी हूं
मैं पुण्य कर्म क्या है मैं जानता हूँ
मैं पाप कर्म क्या है मैं जानता हूँ
मैं अपने आप में ही रहस्य हूँ
मैं पुण्य और पाप को विच कि भेद को जानता हूं
मैं योगी हूं
मैं सत्य का ज्ञाता हूँ
मैं हरि भक्त हूँ
मैं नारायण भक्त हूँ
मैं निराकार भक्त हूँ
मैं अजन्मा भक्त हूँ
मैं आदि नंदन भक्त हूँ
मैं भगवान भक्त हूँ
मैं परमपिता परमेश्वर को अपने आप में महसूस करता हूं
मैं योग लगाने में समर्थ हूँ
मैं योग माया से परिचित हूं
मैं कलगो के प्रभाव से मुक्त हूं
मैं सदा से हूं उनका भक्त हूं
मैं आदि शक्ति का अंश हूँ
मैं सनातन धर्म का प्रचारक  हूं
मैं सत्य का प्रचारक हूं
मैं कल्पना शक्ति हूं
मैं वास्तव हूं
मैं दयावान हूं
मैं दानी हूं
मैं सेहतमंद हूं
मैं प्रेमी हूं
मैं प्रेम हूं
मैं शांति योग लगाने में समर्थ हूं

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मैं शांत हूं
मैं शांति हूं
मैं आचार्य निति हूं
मैं सब को इज्जत करता हूं
मैं सभी जीव से स्नेह करता हूं
मैं सत्य का उपासना में समर्थ हूं
मैं तैयागी हूं
मैं सत्य का उर्जा हूं
मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूं
मैं देश भक्त हूं
मैं सभी धर्मों को एक समान ही मानता हूं
मैं श्री राम को मान्यता देता हूं
मैं श्री कृष्ण को मान्यता देता हूं
मैं साईं बाबा को मान्यता देता हूं
मैं गुरु नानक देव जी को मान्यता देता हूं
मैं यीशु मसीह को मान्यता देता हूं

यह भी पढ़ें : बुरे वक्त का सबसे बड़ा फायदा क्या है ?

मैं रहिम को मान्यता देता हूं
मैं गोतम बुद्ध को मान्यता देता हूं
मैं महावीर को मान्यता देता हूं
मैं भागवत गीता को मान्यता देता हूं
मैं कुरान को मान्यता देता हूं
मैं गुरु ग्रंथ साहिब को मान्यता देता हूं
मैं वाईवल को मान्यता देता हूं
मैं वास्तविकता को जनता हूं
मैं वास्तविकता को मान्यता देता हूं
मैं वेदों को मान्यता देता हूं
मेरे प्यारे मित्रों आप से हाथ जोड़कर प्रार्थना है की यदि आपको हमारी जानकारी अच्छा लगता है तो आप हमारे पोस्ट को औरों के साथ शेयर जरुर करें और हमारे जितने भी सोशल मीडिया पेज़ है वहां पर जाके हमें फॉलो करें फेसबुक पर फाॅलो करें यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें
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ॐ साक्षिणे नमः।

पैसे से क्या नहीं प्राप्त की जा सकती है ?

पैसे से क्या नहीं प्राप्त की जा सकती है ? What can't be gained with money?


पैसे से क्या नहीं प्राप्त की जा सकती है ?



पैसे से वैभव खरीदा जा सकता है। - सुख नहीं

पैसे से सैया खरीदा जा सकता है। - नींद नहीं

पैसे से पुस्तकें खरीदा जा सकता है। - ज्ञान नहीं

पैसे से भोजन खरीदा जा सकता है। - भूख नहीं

पैसे से दवा खरीदा जा सकता है। - स्वास्थय नहीं

पैसे से मकान खरीदा जा सकता है। - घर नहीं

पैसे से एश्वर्य खरीदा जा सकता है। - सभ्यता नहीं

पैसे से आमोद‌ खरीदा जा सकता है। - सुख नहीं

पैसे से मंदिर मिल खरीदा जा सकता है। - भक्तिरस नहीं

पैसे से नौकर खरीदा जा सकता है। - वफादारी नंही

पैसे से आदमी खरीदा जा सकता है। - आत्मीयत नहीं

पैसे से पद खरीदा जा सकता है। - महानता नहीं

पैसे से इंसान खरीदा जा सकता है। - इंसानियत नहीं

पैसे से सास्त्र खरीदा जा सकता है। - सास्त्रता नहीं

पैसे से मनपसंद वस्तु खरीदा जा सकता है। - मन की सांति नहीं

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